Wednesday, 24 February 2016

Shanti march 2016

    “People for Nation” Shanti March in Delhi on date : 21/02/2016
      from Rajghat to Jantar-Mantar
पिछले दिनों भारत की राजधानी दिल्ली में “JNU” में जो कुछ भी हुआ उसने हर भारतीय नागरिक को सोचने पर मज़बूर कर दिया कि आज जब हमारा देश कई प्रकार की सामाजिक एवं आर्थिक समस्यायों से जूझ रहा है, उस समय में भारत में ही एक ऐसा युवा वर्ग भी है जो भारत में ही रहकर भारत के विरोध में नारे लगा रहा है। आज जहाँ भारत के नागरिकों में देश भक्ति की भावना कम होती दिख रही है, तो ऐसे समय में ऐसी देश विरोधी गतिविधियों का बढ़ना देश के भविष्य के लिए एक बड़ा खतरा बनता दिख रहा है लेकिन 21 फरवरी 2016 को राजघाट से लेकर जंतर-मंतर तक जो शांति मार्च निकाला गया उससे यह साबित हो गया कि देश के ग़द्दार कितनी भी कोशिश कर लें वह हमें तोड़ नहीं सकते। यह शांति मार्च 21 फरबरी सुबह 9 : 00 बजे से राजघाट से आरम्भ हुआ भारतीय सेना के पूर्व सैनिकों की अगुआई में इस मार्च में लगभग 40 हज़ार लोगों ने भाग लिया भाग लेने वालों ने भारत में रहकर भारत के खिलाफ नारे लगाने वालों के विरोध में प्रदर्शन किया और भारत माता की जय, वन्दे मातरम् के जय घोष के साथ पैदल चलते गए। प्रशासन के अछे परिवहन नियंत्रण के कारण कोई अप्रिय घटना तो नहीं घटी, किन्तु भारी ट्रैफ़िक जाम से लोगों को परेशानी अवश्य हुई। इसके बावजूद उन लोगों ने जाम में रुककर भी शांति मार्च में भाग ले रहे लोगों का उत्साह बढाया। इस मार्च की विशेषता यह थी कि हर धर्म, वर्ग जाति के लोगों ने इसमे भाग लिया, और उन लोगों को चेतावनी दी कि हम भारत वासियों को आपस में बांटना, लड़ाना इतना आसान नहीं है। मैं धन्यवाद करना चाहता हूँ उन सभी का जिन्होंने इस रैली में भाग लेकर देश की एकता एवं अखंडता का इतना विशाल रूप दिखाया जो की भविष्य में अच्छे परिणामों को जन्म देगा।

“जय हिन्द”





Thursday, 15 January 2015

Sangeet Aur Plastic Ka Prem

संगीत और प्लास्टिक का प्रेम

संगीत ईश्वर की देन है, संगीत प्रकृति से प्रकट होकर मनुष्य की आत्मा को शांति और सुकून दे रहा है . प्राकृतिक संगीत का कोई अंत नहीं है . बहते हुए झरनों, नदोयों में जल की कल-कल करती आवाज़ें हों या पक्षियों का चहचहाना, संगीत इस सृष्टि में समाया हुआ है . किसी लेखक ने कहा है कि  “Music is the Language of soul” संगीत आत्मा की आवाज़ है . बदलते समय के साथ-२ इस संगीत के माध्यम भी बदलते रहे हैं . विज्ञान का सिद्धांत है कि "ध्वनि गमन के लिए माध्यम कि आवयश्कता होती हैऔर संगीत ध्वनि से ही उत्पन्न होता है . जब मनुष्य ने विज्ञान के क्षेत्र में तरक्की की तो उसने इस संगीत को सदा के लिए संजोकर रखने का प्रयास किया .  इस प्रयास में प्लास्टिक एक प्रभावी माध्यम बना . सबसे पहले इस संगीत ने प्लास्टिक के एल .पी. रिकॉर्ड डिस्क के साथ खुद को जोड़ा, और एक लम्बे अंतराल तक रिकॉर्ड प्लेयर की डिस्क जो कि प्लास्टिक की होती थी, उसकी सतह पर उकेरी गयी लकीरों में खुद को संजोये रखा और रिकॉर्ड प्लेयर की सुई की चुभन को भी सहते हुए संगीत के साथ प्रेम किया और हमें आनंदित किया . समय बदला और संगीत का माध्यम रिकॉर्ड प्लेयर डिस्क से बदलकर टेप रिकॉर्डर की ऑडियो कैसेट (जो कि प्लास्टिक कि होती थी) से जा जुड़ा और ऑडियो कैसेट के रिबन में समा गया .  कैसेट की रील का दो चकरियों पर घूमना और स्वयं एक इलेक्ट्रॉनिक मैगनेट (टेप रिकॉर्डर हेड) का करंट सहते हुए भी संगीत का दामन नहीं छोड़ा . समय ने फिर करवट ली और ऑडियो कैसेट का रूप बदलकर प्लास्टिक की सी.डी.(कॉम्पैक्ट डिस्क) में परिवर्तित हो गया .  प्लास्टिक की सी.डी. में संगीत को ज्यादा लम्बे समय तक संजोकर रखा जाने लगा, क्योंकि इसमें कोई मशीनी घर्षण ना होने की वजह से संगीत की गुणवत्ता को कोई हानि नहीं पहुँचती थी . प्लास्टिक ने अपने प्रेम को प्लास्टिक से बांधे रखा और स्वयं को सुरक्षित कर लिया I समय का चक्र फिर घूमा और संगीत ने प्लास्टिक का माध्यम फिर बदला .  इस बार संगीत बहुत ही महीन आकार में परिवर्तित हुआ, यानि कि आज के युग के पेन ड्राइव और मेमोरी कार्ड्स भले ही इन उपकरणों में लगी माइक्रो चिप तो प्लास्टिक की नहीं होती परन्तु इसको ढकने या कवर करने के लिए अब भी प्लास्टिक का ही इस्तेमाल होता है . पेन ड्राइव , मेमोरी कार्ड हो या कार्ड रीडर इन सबको कवर करने में प्लास्टिक ही प्रधान है . यानि कि आधुनिक युग में प्लास्टिक का संगीत से लगाव और प्रेम टूटा नहीं है . और मैं यह आशा करता हूँ कि यह प्रेम सदा बना रहे .      

Friday, 2 January 2015

Jhaadu ka Safar

a journey of broom by a different angle

झाड़ू का सफर(Sweep of the broom)

झाड़ू का नाम लेते ही हमें सफाई का ध्यान आने लगता है. मनुष्य को आरम्भ से ही सफाई पसंद है, इसलिए उसने झाड़ू का अविष्कार किया. यह एक ऐसा यन्त्र है जो सफाई करने के काम आता है. बांस की तीलियों को इकट्ठा कर बांधकर बनाया गया झाड़ू एकता का प्रतीक माना गया है. मैं आपको इस झाड़ू के सफर से अवगत कराना चाहता हूँ. यह यन्त्र शुरू से ही समाज में कई चमत्कार करता रहा है. सफाई करते-करते यह झाड़ू विदेशी जादूगर "हैरी पॉटर" का वाहन भी बना और समाज से बुराई का सफाया किया. फिर इस झाड़ू ने घर से निकलकर राजनीति में कदम रखा और "केजरीवाल जी" के हाथों में आया, उन्होंने समाज में फैली भ्रष्टाचार की गन्दगी को साफ करने के लिए अपना चुनाव चिन्ह ही झाड़ू को बनाया, और समाज में फैली बुराई को साफ़ करने का प्रयत्न किया, किन्तु वह झाड़ू उनके हाथों से फिसलकर "मोदी जी" के हाथों में आ गया और उन्होंने भी भारत में सफाई अभियान के लिए इस शस्त्र का उपयोग किया. बड़ी-बड़ी हस्तियों ने सफाई के इस कार्य में योगदान दिया है. अब देखना यह है कि यह झाड़ू अब अपनी शक्ति से क्या चमत्कार दिखलायेगा और भारत को स्वछ करेगा या केवल "सेल्फियां" खिंचवाकर फेसबुक की ही शान बढ़ाएगा.                      

Saturday, 27 December 2014

SARBANS DANI SRI GURU GOBIND SINGH JI



srbMs dwnI guruU goibMd isMG jI

iliKAw hY ik…

mOq su`xI AiBmnMU dI jdoN Arjx,
iF`lI h`Q coN qIr kmwn ho geI [
qwnsyn suixAw jdoN p`uq moieAw,
rgW KuSk qy bMd zubwn ho geI [
morD`j dy A`QrU AMq if`g pey,
botI ijgr dI jdoN vrwn ho geI [
dSr`Q if`g mh`l qoN kUc kIqw,
auhly A`KW qoN jdoN sMnqwn ho geI [
rwm ro ipAw bnW dy iv`c jwky,
jdoN sIqw dI peI judweI isgI,
dUjI vwr iPr jMg dy iv`c roieAw,
jdoN lSmx ny mUrCw KweI isgI [
myG moieAw qy rwvx ny AwiKAw sI,
A`j sony dw mh`l vrwn hoieAw [
AnHI-AnHy ny ikhw koeI nhIN swfw,
Srvx qIr dw jdoN nSwn hoieAw [
iebRwhIm ny AKNw qy p`tI b`nHI,
jdoN pu`q dw sI bildwn hoieAw [
pUrx moieAw qy ie`CrW kihx l`gI,
A`j AauNqrw ku`l jhwn hoieAw [

ey pr DMn-DMn hYN qUM bwjW vwilAw,
ijhny dyS qoN vwr pirvwr id`qw [
ie`k p`l vI hoNslw hwirAw nhIN,
h`s-h`s ky smW guzwr id`qw [
iq`n pIiVHAW mulk dI ByNt krky,
qUM Aihswn nhIN iksy qy krn vwlw [
AYsw guruU nhIN imlygw Pyr muVHky,
bwNh do jhWn q`k P`Vn vwlw [

vwihgurU jI kw Kwlsw vwihgurU jI kI Pqih


SIKH DHARAM & SHRAADH

  # ਸਿੱਖ ਧਰਮ ਅਤੇ ਸ਼ਰਾਧ # ਪਿੱਤਰ ਪੂਜਾ ਅਤੇ ਸ਼ਰਾਧ ਜੋ ਕਿ ਹਿੰਦੂ ਸਮਾਜ ਦੀਆਂ ਪੁਰਾਤਨ ਰਹੁ ਰੀਤਾਂ ਹਨ , ਇਹਨਾਂ ਰੀਤਾਂ ਨੂੰ ਬ੍ਰਾਹਮਣ ਸਮਾਜ ਕਾਫੀ ਪੁਰਾਣੇ ਸਮੇ ਤੋਂ ...